हल्कापन - अमित कोरी



यह पल भर का रोना भी,
समंदर जितनी सुकून का एहसास कराता है,
गहरी से गहरी पीड़ा,
दिल में उतर कर आंखों को भर देती है
सारा दर्द बड़ी चमकीली बूंदे बनकर,
 टपक जाता है,
और उसके बाद का यह हल्कापन...
कभी कभी रोना दुनिया की 
सबसे अच्छी चीजों में से एक लगती है, 
आंखों को जैसे दरिया का किनारा मिल जाता है,
और मन, मन तो रुई जितना हल्का हो जाता है...

(हल्कापन)
- अमित कोरी

No comments

Powered by Blogger.